Barish ko kaise mapa jata hai
Barish ko kaise mapa jata hai

अगर आप यह जानना चाहते हैं कि Barish Ko Kaise Mapa Jata Hai तो आप इस आर्टिकल को अंत तक पढ़िए। इस आर्टिकल में आपको इसी के बारे में बताया गया है।

बारिश के दिनों में अक्सर यह सुनने को मिलता है कि आज इस शहर में इतना मिलीमीटर (mm) वर्षा हुई है। यह सुनने के बाद आपके मन में एक सवाल आता होगा कि आखिर बारिश को मापा कैसे जाता है। कि आज कितना बारिश हुआ है।

तो आपको बता दे वर्षा मापने के लिए Rain Gauge या वर्षा मापी यंत्र का उपयोग किया जाता है। और इस यंत्र को खुले और ऊंचा स्थान पर रखा जाता है यानी कि इसे ऐसे जगह रखा जाता है। जहां पेड़ पौधे दीवारें जैसी चीजें ना हो। ताकि बारिश का जो पानी होता वह बिना कहीं रुके इस यंत्र में आकर गिरे।

आपको बता दें यह यंत्र एक डिवाइस होती है यह सिलेंडर जैसी होती है जिसके ऊपरी हिस्से पर एक कीप लगी होती है। जिससे बारिश का पानी इस कीप में गिर कर अंदर आता है। और कीप के नीचे लगे बोतल में इकट्ठा हो जाता है। आपको बता दें पहला वर्षा मापी यंत्र क्रिस्टोफर ब्रेन ने बनाया था।

आपको बता दें एक आदर्श वर्षा मापी यंत्र वह होता है जिसमें खोखला बेलन हो और अंदर एक बोतल रखी हो और उसके ऊपर एक कीप लगा हो ताकि बारिश का पानी इस कीप में जायेगा। उसके बाद बारिश के पानी को स्केल द्वारा मेजर कर लिया जाता है। यह काम करने में 10 मिनट से ज्यादा का समय नहीं लगता है।

आइये अब जान लेते हैं कि बारिश को मापा कैसे जाता है।

Barish Ko Mapa Kaise Jata Hai

जब बारिश को मापना होता है। तो सिलेंडर को खोलकर बोतल में जमा पानी को कांच के बीकर में डाला जाता है। बीकर पर मिली मीटर के नंबर लिखे होते हैं अब जितना मिली मीटर पानी बीकर में आता है। वही बारिश का माप होता है। मतलब कि जितना ही ज्यादा मिली मीटर पानी रहेगा। उतना ही ज्यादा बारिश हुई होती है।

आपको बता दें कि मानसून के दिनों में बारिश को 1 दिन में दो बार मापा जाता है एक बार सुबह 8:00 बजे और एक बार शाम को 5:00 बजे मापा जाता है।

उम्मीद करता हूं। कि आज का यह आर्टिकल पढ़कर आपको समझ में आ गया होगा की Barish ko Kaise Mapa Jata Hai ऐसे और भी जानकारी के लिए आप इस साइट पर हमेशा विजिट करते रहें।

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