जानिए बारकोड के बारे में पूरी जानकारी

Barcode kya hai

अक्सर आप को बिस्किट के पैकेट, घरेलू सामान के पैकेट या साबुन, क्रीम जैसे डब्बे पर किनारे एक बहुत सी समांतर लाइन की एक समूह दिखती है। जो नीचे दिए गए इमेज की तरह दिखता है।

यह लगभग सभी पैकेट या डब्बे वाले उत्पाद पर होता है। इसी को ही बारकोड कहा जाता है इस आर्टिकल में इसी के बारे में आपको बताने वाले हैं।


बारकोड आपको स्टोर पर भी देखने को मिलता है। आजकल जमाना डिजिटल होता जा रहा है। ऐसे में आगे इसकी महत्ता काफी ज्यादा हो सकती है। अगर आप वॉलेट जैसे paytm, mobikwik को देखेंगे तो यह पेमेंट के लिए भी काफी ज्यादा उपयोग किया जाता है। इसके अलावा बारकोड का उपयोग बहुत से जगहों पर भी किया जाता है।

बारकोड की सहायता से किसी चीज़ की जानकारी जल्दी इकट्ठा की जा सकती है इसको जानकारी जल्दी से जानकारी करने के लिए बनाया ही गया है।

काम कैसे करता है

बारकोड के बारे में जानने के बाद चलिये अब आपको बताते है कि यह काम कैसे करता है अगर आप पैकेट पर का बारकोड देखेंगे तो यह समांतर लाइन की समूह होती है। जिसमें कुल 95 खाने होते हैं। सभी खाने 0 और 1 के रूप में बटा होता हैं। इसको पढ़ना हमारे लिए तो नामुमकिन है। लेकिन मशीन से इसको पढ़ा जा सकता है।


यदि अगर आप किसी उत्पाद का बारकोड स्कैन करेंगे उसमें उसकी पूरी जानकारी होती है। अगर आप किसी बिस्किट के पैकेट के बारकोड को स्कैन करेंगे तो उसमें बिस्किट के दाम, कब बना है, किस कंपनी ने बनाया है, किस देश में बना है। यह सभीजानकारी मिलेंगे।

लेकिन अगर आप वॉलेट या पेमेंट का बारकोड को देखेंगे तो उसे स्कैन करने पर उसमें आपको अकाउंट नंबर, नाम, IFSC कोड जैसे उससे संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारियां होती है। बारकोड स्कैनर द्वारा बारकोड स्कैन करके यह सभी जानकारी तुरंत इकट्ठा हो जाती है।

फायदे

मैंने आपको ऊपर बताया कि बारकोड में प्रोडक्ट की सारी जानकारी छिपी होती है इसको स्कैन करने से सारी जानकारी तुरंत इकट्ठा हो जाती है अगर बारकोड नहीं होता तो यह सभी जानकारी आपको खोज-खोज कर इकट्ठा करनी पड़ती। बारकोड को इसी लिए बनाया गया है ताकि कम समय में किसी प्रोडक्ट या किसी चीज की सभी जानकारियां जल्द से जल्द इकट्ठा हो सके।

प्रकार

अब आपके मन में एक सवाल उठता होगा कि किसी उत्पाद के पैकेट का बारकोड और किसी वालेट के बारकोड दोनों बिल्कुल तो ही अलग होते हैं। आपको बता दे बारकोड दो तरह के होते है।


1- 1D बारकोड

पैकेट पर जो आपको बारकोड देखने के लिए मिलता है। जो समांतर रेखाओं से बना होता है। यह आपको पैकेट या डब्बे पर देखने को मिलता है।

2- 2D बारकोड

यह बारकोड आपको वालेट में देखने को मिलता है। जो झिलजिला की तरह होती है इसका उपयोग वालेट जैसे जगह पर किया जाता है

किसने बनाया और कब

चलिए अब थोड़ी सी जानकारी किसने बनाया और कब बना के बारे में दे देते हैं। अगर आविष्कार की बात करें तो सबसे पहले जोसफ वुडलैंड 1949 में इसका आविष्कार किया जो कि एक मैकेनिकल इंजीनियर थे। लेकिन आपको बता दें 1974 में पहली बार बारकोड को स्कैन किया गया।

आज का जमाना तेजी से डिजिटल में बदलता जा रहा है। मेरे हिसाब से आगे इसकी बहुत ज्यादा महत्व हो जाएगी। क्योंकि बारकोड द्वारा कम समय में किसी चीज की पूरी जानकारी इकट्ठा हो सकती है।

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About Amit Maurya

मेरा नाम अमित मौर्या है। मैं उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से हू। मेरा बचपन से शौक था कि दूसरों की मदद करू। जो मैं एक ब्लॉगर के रूप में कर रहा हू।

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